Monday, June 28, 2010
Tuesday, June 22, 2010
Monday, June 21, 2010
अपने को ही सुधार.....
Sunday, June 20, 2010
जो पतित सूर्य का प्रकाश पाता है, जल जिसकी प्यास बुझाता है, वायु जिसे श्वास लेने देती है, पृथ्वी जिसे आश्रय देती है, आप उसे प्यार नहीं दे सकते?
झूठे झगड़ेको छोड़कर साधनमें लग जाओ-जी-जानसे लग जाओ। मनुष्य-जीवन बहुत थोड़े दिनों का है देर न करो। याद रक्खो-देर में कहीं मानव जीवनका अवसान हो गया तो पीछे बहुत पछताना पड़ेगा।
Tuesday, June 15, 2010
जो पतित सूर्य का प्रकाश पाता है, जल जिसकी प्यास बुझाता है, वायु जिसे श्वास लेने देती है, पृथ्वी जिसे आश्रय देती है, आप उसे प्यार नहीं दे सकते
जहाँ भगवान् के भक्तजन हों, वह जगह पवित्र हो जाती है, वहाँ की वायु पवित्र हो जाती है
Wednesday, May 19, 2010
Monday, May 17, 2010
Friday, May 14, 2010
Friday, May 7, 2010
Sunday, May 2, 2010
यह दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है....
कोई दिन में तारे दिखाए तो क्या है ,
यह महलो यह तख्तो यह ताजो की दुनिया,
यह दोलत के भूखे रिवाजो की दुनिया ,
हकीकत के दुश्मन समाजो की दुनिया,
यह दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है ,
हर एक जिस्म के साथ ही मौत चलती ,
यह बढती जवानी अभी देख उड़लती ,
जहा है ख़ुशी वही आहे निकलती ,
यह दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है ,
हर एक दिल है घायल हर एक रूह प्यासी ,
निगाहों में उलझन है भीतर उदासी ,
हर एक जोश के साथ है बदहवासी ,
यह दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है ,
यहाँ तो खिलौना है इंसान की हस्ती ,
यह बस्ती है मुर्दा परस्तो की बस्ती,
यहाँ पर तो जीवन से है मौत सस्ती ,
यह दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है ,
यहाँ सब भटकते है बदकार बनकर,
यहाँ जिस्म सजते है बाजार बनकर ,
यहाँ प्यार होता है व्यापर बनकर,
यह दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है ,
यह दुनिया जहा आदमी कुछ नहीं है ,
वफ़ा कुछ नहीं दोस्ती कुछ नहीं है ,
यहाँ सत्य की कदर भी कुछ नहीं है ,
यह दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है ,
समझ है तो दुनिया के पीछे न भागो ,
जो भी मद हो छोडो अपने में जागो ,
कुछ अपना न मानो
हे नाथ! दूसरा कौन है जो आपके सदृश दीनों को छाती से लगा ले?जिसको सारा संसार घृणाकी दृष्टिसे देखता है,घर के लोग त्याग देते हैं,कोई भी मुँह से बोलनेवाला नहीं होता,उसके आप होते हैं,उसको तुरंत गोदमें लेकर मस्तक सूँघने लगते हैं,हृदय से लगाकर अभय कर देते हैं।ऐसा कौन पतित है जो आपको पुकारनेपर भी आपकी दयादृष्टिसे वञ्चित रहा है? हे अभयदाता!मैं तो हर तरहसे आपकी शरण हूँ,आपका हूँ,मुझे अपनाइये प्रभु!
जहाँ भी गुरुवर चरण धरे वो धरती नसीबों वाली है...
बिन मांगे सब कुछ वो पता ,उसका मंगल होता है,
गुरु ज्ञान के सूरज से फिर रात न रहती काली है,
जहाँ भी गुरुवर चरण धरे वो धरती नसीबों वाली है,
हम तो जाते भूल उन्हें पर वो तो पास ही रहते हैं,
उनका ह्रदय कोमल निर्मल सदा वो हित ही करते हैं,
हम सबका जीवन एक बगिया , वो बगिया के माली हैं,
जहाँ भी गुरुवर चरण धरे वो धरती नसीबों वाली है,
गुरु शिष्य का रिश्ता जग में सबसे प्यारा होता है ,
पवन हो जाता है वो जो गुरु की याद में रोता है,
गुरु आज्ञा मानी तो समझो अपनी बिगड़ी बना ली है,
जहाँ भी गुरुवर चरण धरे वो धरती नसीबों वाली है …
इनके चरणों में सुख सच्चा , सरे तीर्थ धाम यही ,
गुरु जो देते उससे ऊँचा होता है कोई नाम नहीं,
सार्थक है बस उसका जीवन , जिसने भक्ति पा ली है,
जहाँ भी गुरुवर चरण धरे वो धरती नसीबों वाली है …
निगुरे निंदक महा पापी निर्दोष पे डिश लगते है ,
फिर भी कैसा संत ह्रदय वो सब कुछ सहते जाते हैं,
कर्मों की गति गहन है निंदक मद में फुले जाते हैं ,
ऐसे महापापी तो सीधे नरक कुंड में जाते हैं...
अनमोल वचन...
2) अहंकर सदा लेकर प्रसन्न होता है, प्रेम सदा देकर संतुष्ट होता है
3) अहंकर को अकड़ने का अभ्यास है, प्रेम सदा झुक कर रहता है
4) अहंकर जिस पर बरसता है उसे तोड़ देता है, प्रेम जिस पर बरसता है उसे जोड़ देता है
5) अहंकर सबको ताप देता है, प्रेम मीठे जल सी तृप्ति देता है
6) अहंकर संग्रह (collection) में लगा रहता है, प्रेम बाँट बाँट (distribution) कर बढता है
7) अहंकर सबसे आगे रहना चाहता है, प्रेम सबके पीछे रहने में प्रसन्न है
8) अहंकर बहुत कुछ पाकर भी भिखारी है, प्रेम आकिंचन रहकर भी पूर्ण-धनी है
utho pyare....
sukh dukh ....
apane shaant swabhaav me sthit baithe to badaa ras aataa hai… bramhgyaani ke aatmaa ke sukh ke aage indra kaa sukh bhi kuchh nahi…indr jis chij ko chaahe, vo aage aa jaaye .. ye sukh ki paraakaasthaa hai.. lekin aatm sukh ke aage ye sukh paane ki kalaa sau vi kalaa hai.. indr jo chij chaahegaa vo bhogane ke liye sukh paane ke liye sharir ki shakti kharchegaa.. aatmshakti waalaa shakti kharchegaa hi nahi, vo to aise hi sukh me hai..!
koyi ichhaa nahi.. sukh swarup aatmaa chamcham laheraa rahaa hai…khud bhi sukh me aur jahaa najar daale un ko bhi sukh dilaaye…!!.. ye nirdosh sukh hai..ye antarang sukh hai…!!!
Sunday, April 25, 2010
जिस किसी कामको करो,उसको सुचारुरुपसे करो,जिससे आपके मनमें सन्तोष हो और दूसरे भी कहें कि बहुत अच्छा काम करता है।लिखना हो,पढ़ना हो,बिक्री करना हो,खरीदारी करना हो आदि-आदि संसारका जो कुछ काम करना हो,उसको बड़े सुचारुरुपसे करो।माता-बहनें रसोई बनायें तो अच्छी तरह से बनायें।सामग्री भले ही कैसी हो,पर चीज बढ़िया बनायें।सबको कैसे संतोष हो-ऐसा भाव रखकर सब काम करें।
Whatever work you do, do it satisfactorily, whereby you feel contented in your mind, and others also feel that he is doing a fine job. Whether it be writing, reading, selling, buying, etc., whatever work there is in this life, do it well and with great joy. Mothers-sisters, when you cook, do it well. Whatever may be the available supplies, but make great things. Do all work with the sentiments, that how can I make everyone satisfied
किसी गरीबके सामने गर्वभरी वाणी बोलना,उसके साथ रुखा और कठोर व्यवहार करना भगवान् का अपराध है;क्योंकि उस गरीबके रुपमें भगवान् ही तुम्हारे सामने प्रकट हैं।अतएव सभीके साथ नम्र होकर मधुर वाणी बोलो;अपनी विनय-विनम्र पीयूषवर्षिणी वाणी तथा व्यवहारके द्वारा सर्वत्र शीतल मधुर-सुधाकी धारा बहा दो और यह सब करो केवल भगवान् की सेवा के लिये।तुम्हारी सेवासे भगवान् बड़े प्रसन्न होंगे और उनकी प्रसन्नता तुम्हारे जीवनको परम सफ़ल बना देगी।
In front of someone poor, to speak with arrogance, to speak and relate with them roughly and with harshness is a slander on God. God Himself has appeared in front of you in the form of the poor person. Therefore speak with humility and with a sweet and pleasant voice. And relating with others in a courteous-mild, nectar-filled voice, let the cool, sweet-ambrosia flow and do all of this to serve God. God will be very pleased by your service and his happiness will make your life an eternal success.
कष्टमें हमें भगवान् याद आते हैं।हमलोग संसारके तुच्छ,नाशवान् भोगोंके पीछे भगवान् को भूले रहते हैं।इसलिये बीच-बीचमें कष्ट देकर भगवान् हमें चेतावानी देते रहते हैं कि मुझे भूलो मत,नहीं तो बड़ी दुर्दशा होगी,यह मनुष्यशरीर भोगोंके लिये नहीं मिला है,मुझे प्राप्त करने के लिये ही मिला है-इसलिये इसे व्यर्थ कामोंमें न गँवाओ।
In difficulties, we remember God. We forget God in the midst of running after worldly sense enjoyments that are temporary and worthless. Therefore inbetween by giving us some difficulties, God is alerting us to not forget Him. Without that our state would be terrible. This human body has not been received for sense enjoyments. It has been received only to realize Me - therefore do not waste it away on useless activities.
साधन से न तो निराश होना चाहिए और न ही हार स्वीकार करनी चाहिए।जो साधक साधन करने से निराश नहीं होता और हार स्वीकार नहीं करता,वह अवश्य सिद्धि पाता है।असफ़लता का कारण एकमात्र साधन से निराश होना और हार स्वीकार करना है,जो साधक की अपनी ही असावधानी है।
One must not feel dejected by their spiritual disciplines nor accept a defeat. an aspirant that is not feeling a sense of hopelessness and does not accept defeat, he will definitely attain perfection. The reason for lack of success is due to disappointment with one's spiritual discipline and due to accepting defeat, which is an aspirant's own lack of caution and alertness!
Thursday, April 22, 2010
Tuesday, April 20, 2010
जब प्राण तन से निकले...
गोवोंद नाम लेकर तब प्राण तन से निकले...
श्री गंगा जी का तट हो या युमना का बंसी वाट हो....
मेरा सावरा निकट हो जब प्राण तन से निकले...
इतना तो करना स्वामी, जब प्राण तन से निकले...
पीताम्बरी कासी हो, छबी मन मै ये बसी हो...
होठो पे कुछ हसी हो, जब प्राण तन से निकले...
गोवोंद नाम लेकर तब प्राण तन से निकले...
जब कंठ प्राण आये, कोइयी रोग न सताये...
यम दरस न दिखाये, जब प्राण तनसे निकले...
गोवोंद नाम लेकर तब प्राण तनसे निकले...
उसवक्त जल्दी आना, नहीं स्याम भूल जाना...
राधे को साथ लाना, जब प्राण तन से निकले...
गोवोंद नाम लेकर तब प्राण तन से निकले...
एक भक्त की है अर्जी खुद गरज की है जर्गी ...
आगे तुम्हारी मर्जी, जब प्राण तन से निकले...
गोवोंद नाम लेकर तब प्राण तन से निकले...
इतना तो करना स्वामी, जब प्राण तन से निकले...
Monday, April 19, 2010
Sunday, April 18, 2010
Saturday, April 17, 2010
Thursday, April 15, 2010
Wednesday, April 14, 2010
Tuesday, April 13, 2010
Monday, April 12, 2010
Sunday, April 11, 2010
Wednesday, April 7, 2010
Guru Giyan
hamko tumhare pyar ne insa banadiya.
rahte hai jalve aapke nazro mai hargadhi,
masti ka jam aapne aisa piladiya.
sadguru tumhare gyan ne jina sikha diya,
hamko tumhare pyar ne insa banadiya.
bhula huvatha rasta bhatka huvatha mai,
rehma teri ne mujko kabil bana diya.
sadguru tumhare gyan ne jina sikha diya,
hamko tumhare pyar ne insa banadiya
jisne kiseko aajtak sajda nahi kiya,
vo sarbhi maine aapke dar pe jukadiya
jisdin se mujko aapne apna banaliya
dono jaha ko das ne sab se bhula diya
sadguru tumhare gyan ne jina sikha diya
hamko tumhare pyar ne insa banadiya
Thursday, April 1, 2010
आसक्ति मिटाने के ७ उपाय
आसक्ति मिटाने के ७ सरल उपाय हैं
१- दृढ निश्चय कर लिया जाये कि जो गुरुजी कहेंगे वो मुझे करना ही है बस।
२- वासना पूर्ति के मार्ग में चलने वालों का हम संग नही करेंगे। चाहे कोई भी क्युं न हो, वासना पूर्ति के मार्ग में जो जा रहे है उनकी दोस्ती नही करेंगे ।
3- कभी भी हम लोग ऐसा विचार नही करेंगे कि वासना पूर्ति करने वाले लोग सुखी है। बडे बंगले में रहते है , बडी कार में घूमते हैं, खाक सुखी है सुखी वो है भगवान कृष्ण ने गीता में बताया हैं काम के वेग को और क्रोध के वेग को सहन करते की शक्ति रखता है दम रखता है भगवान कहता है कि बो मेरे मत में सुखी है, "सहयोगी सहसुखी नरः" आप गीता में पढिये ५वे अध्याय में, भगवान नें यह नही कहा है कि काम विकार नही आयेगा क्रोध विकार आयेगा ही नही, लोभ कभी आयेगा ही नही, भगवान ने कहा कि काम का वेग क्रोध का वेग, इस वेग में जो बह नही जाता उसको सहन करने का दम अपने पास रखता है, भगवान श्रीकृष्ण कहते है कि वो मेरे मत में सुखी है और मेरे मत में वो योगी है।
४- अपने भोजन में पवित्रता सदैव रखी जाये। लहसुन प्याज निश्चित ही तमो गुण बढाने वाली चीजें है परन्तु कोई बुजुर्ग है किसी को शारीरिक कोई तकलीफ़ है, खाँसी की तकलीफ़ है या श्वास की बिमारी है वो अगर आदमी थोडा लहसुन, प्याज खा ले तो उसको कोई पाप नही लगेगा, घुटने का दर्द रहता है किसी को, वात प्रकोप रहता है न वायु का तो शरीर में दर्द रहता है घुटनों में कमर में तो किसी को ऐसा दर्द हो घुटनों आदि में तो वह औषधवश लहसुन खा सकता है, अंगेजी दवाई खाये इससे तो अच्छा है की वो थोडी सी हरी लहसुन खा ले, इसका मतलब से नही कि जो जवान है वो लोग सोचे कि हम भी लहसुन प्याज खाये हा शारीरिक तकलीफ़ है तो ठीक है। लोग बडे कमाल के है शरीर का नाश हो ऐसी चीज नही खाते है लेकिन बुद्धि नाश हो जाये ऐसी चीज पैसे देकर खाते हैं। इसलिये भगवत गीता के ६ठे अध्याय से १७वे श्लोक में और १७वें अध्याय से ८वे, ९वे, और १०वे श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण ने आहार सम्बन्धी बहुत बढिया बातें बताई है।
५- अपने जीवन में स्थान की पवित्रता रखी जाये, ऐसी जगह में न जाये जहाँ जाने से रजोगुण बढे और तमो गुण बढे। ऐसी जगह जाने में आग्रह रखें जहाँ जाने से सत्व गुण बढें, भक्ति बढें, भगवान के नाम में रुचि बढें।
६- कभी भी अपना समय बेकार की मेगजीन पढ्ने में, बेकार की टीवी सीरीयल देखने में, बेकार की बातों में न गँवाया जायें। समय मिल गया तो माला से या मन से जप शुरु कर दिया जाय। जप हो गया तो सत्संग की कोई पुस्तक पढी जाय। वो भी पढ ली तो शान्त बैठे और श्वास बाहर-भीतर जाये उस पर जप किया जाये,
७- भगवान कपिल बताते है माता देवहूति को कि माँ आसक्ति निश्चित रूप से दुखः देने वाली है परन्तु वही आसक्ति अगर भगवान और भगवत्प्राप्त गुरु में होती है तो वो तारने वाली होती हैं।
Wednesday, March 31, 2010
Tuesday, March 30, 2010
Monday, March 29, 2010
झूठे झगड़ेको छोड़कर साधनमें लग जाओ-जी-जानसे लग जाओ। मनुष्य-जीवन बहुत थोड़े दिनों का है, देर न करो। याद रक्खो-देर में कहीं मानव जीवनका अवसान हो गया तो पीछे बहुत पछताना पड़ेगा।
भक्ति से मेरे यथार्थ स्वरूप को तत्त्व से तुम जान सकोगे औरे उसे जानते ही तुम उसी क्षण मुझमें प्रवेश कर जाओगे। मैं और तुम दोनों एक ही हो जायँगे।
यदि तुम्हें जीवन के चरम तथा परम लक्ष्य श्रीभगवान् के धाम पहुँचना है, भगवान् को प्राप्त करना है तो इस बात को कभी न भूल कर सावधानी तथा शीघ्रता के साथ आगे बढ़ते जाओ।
Sunday, March 28, 2010
Hai Prabhu
he shanti data , giyan devta ,mara ishtadevta , kay cho tame , mara dil ma cho kem chupaya cho aji sudhi , mane man mandir na dharshan karavo mara nath , mane potana ma dubado mara nath
Atlu madi jay to sukhi thavu , aa kurshi suchi phohich javu to sukhi tavu , kya suthi aa badhu karta rahishu nath , kaya sudhi sansar na janam maran na chakro ma padta rahishu , kya suthi ame sansari vato ma atvata rahishu , bas have to evo di dekhad ke tara ma dubhi jayai , bas kya sudhi duniyavi maja pachad ame dodta rahishu , kem ishavariyi maja ma man nathi dubtu , cigarete , pana , masala and kahava piva ma maja shodhiye chiye kem diyan ma maja nathi avati, kem simran and satsang ma maja nathi aavati bas he gurudev , he nath ave to asli maja dekhadi to duniyavi mana bhuli jayeaye
Pram bharelu haiyu lai ne tare dware aaveyo chu jo tu mujne tarchode to duneya ma mare javu kya? na janu hu pooj tari na janu bhakti ne rit, gandi ghale vane ma hu gato guruji tara geet chacker banine charne tara rahva ne hu aaveyo chu jo tu mujne tarchode to duneya ma mare javu kya?
he mara nath , me mara valuda , janmo thi batki rahaya chiye , taro abhar che mara nath te amne manushaya jo jiwan apyo , have bas aa janam ma aame tane medvi laveye , tara ma dubhi ne tara charano me priti karine tane pami laviye , bas mara prabhu dar rose tane yaad kariye , sansar na sambhado ne kya sudhi sachivishu , bas tara sathe sambhand pako thai jaye to sansar na sambado to dodta pachad aavshe , savare uthu to tari yad aave , divas bar tane yad karta nikade and ratre suvu to bas tara khoda ma suvu , eve daya kara mara prabhu mara nath bas tara sivay kashu yad na rahe mari ankho bas tara didar kare , mari sans bas tara mate chale , mari hriday ma bas tari yad rahe , maru sharir bas tari seva ma ja jaye , jaldi mara nath mane evo di dekhad mara vahaluda
Saturday, March 27, 2010
हे दिन बंधो ! …मेरे जो कर्म दिव्य बने है तो आप की कृपा है; लेकिन नीच कर्मो से बचाने की आप ही कृपा करो.. हे दिव्य प्रभु, नित्य देव तुम ही मेरे अंतरात्मा, अन्तर्यामी हो.. समर्थ हो.. दयालु हो..मुझ पर कृपा करे….’ ऐसे भगवान को पुकारते पुकारते श्वासों-श्वास में भगवन नाम की गिनती करे…तो आप के कर्म दिव्य होने लगेंगे …. मन की दुष्टता, बुध्दी का रागद्वेष, कर्म का बंधन मिटाकर परमात्मा का रस पाने में साधक सफल होने लगता है…..
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय..ना हम वसामि वैकुंठे योगिनाम ह्रुदएंवयी
मद भक्ता यत्र गायंत्री तत प्रतिष्ठामी नारदा
किसी का बुरा ना करो..किसी का बुरा ना सोचो… जनमने मरने के बाद भी मैं रहेता हूँ ऐसा सोचो .. आप के कर्म में अ-शुध्दी ना हो…आप के भाव में अ-शुध्दी नहीं हो.. आप की बुध्दी में ब्रम्हज्ञानी का ज्ञान हो… आप का जन्म दिव्य हो जाएगा….भगवान बोलते मैं ऐसे योगियों के ह्रदय में जरुर मिलता हूँ जिन के ह्रदय में दिव्यता मधुरता और प्रसन्नता होती…वहा मेरी पूर्ण पूजा होती है..
हरी सम जग कछु वस्तु नहीं प्रेम सम पंथ सदगुरू सम सज्जन नहीं गीता सम नहीं ग्रन्थ ll
४० दिन तक रोज १० मिनट भगवान को एक टक देखे तो ४ चंचलता दूर हो जायेगी(वाणी की, हाथो की, नेत्रों की और पैरो की चंचलता दूर होगी) …हरी….. ओम्म्म्म्म्म्म्म् इस प्रकार भगवान के नाम का लंबा उच्चारण करे तो ज्ञान तंतु पुष्ट होंगे भगवत सत्ता का संचार आप के ७२ करोड़ ७२ लाख १० हजार २०१ नाड़ियों में होगा..
किसी के घर में मृत्यु हुयी तो उन्हें मंगलमय जीवन मृत्यु ये पुस्तक पढ़ाना.. मृतक की याद में रोते तो आँख-नाक से जो गन्दगी निकलती वो उन को पिलाया जाता जो मृतको के लिए रोते है..
ऐसा शास्त्रों में लिखा है..diव्य प्रेरणा प्रकाश और जीवन विकास ये पुस्तके जरुर पढ़े..
हरी ओम्म्म्म्म्म्म्ॐ
तम नमामि हरिम परमॐ
तम नमामि हरिम परमॐ
तम नमामि हरिम परम
