जो किसी को बुरा समझता है,वह उससे ज्यादा बुरा है,जो बुरा करता है।बुराई करने वाले के जीवन में कभी भी सजगता आ सकती है और वह पश्चाताप करके बुराई को छोड़ सकता है;किन्तु जो दूसरे को बुरा समझता है,उसके जीवन में तो मिथ्या अभिमान की ही उत्पति और पुस्टि होती रहती है।
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