Tuesday, March 30, 2010

जो पमेश्वर महापामर दीन-दुखी अनाथको याचना करने पर उसके दुर्गुण और दुराचारों की ओर खयाल न करके बच्चे को माता की भाँति गले लगा लेता है,ऎसे उस परम दयालु सच्चे हितैषी परम पुरुष की इस दया के तत्व को जाननेवाला पुरुष उसकी प्राप्ति से वंचित कैसे रह सकता है?

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