Saturday, March 27, 2010
यह बात तो मानना ही चाहिये कि भगवान् ग्रहण करके छोड़ते नहीं,पर यदि भजन में,सेवा में शिथिलता रहती है तो भगवान् से यह प्राथना अवश्य करनी चाहिये कि प्रभो! ये हमारे दिन जो कटते हैं,वे आपकी विस्मृति में ही कट जाते हैं,आपका निरन्तर स्मरण नहीं होता और न स्मरण न होने क दु:ख ही होता है। भगवन् हमारी यह दैन्यपूर्ण स्थिति दूर हो जाय।
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