यदि तुम अपने लक्ष्य को - भगवान् को कभी न भूलते हुए सदा निर्लेप तथा सावधान रहकर भगवान् की ओर चलते रहोगे तो यह मानव-शरीर तुम्हें निश्चय ही वहाँ पहुँचाने में समर्थ होगा।
झूठे झगड़ेको छोड़कर साधनमें लग जाओ-जी-जानसे लग जाओ। मनुष्य-जीवन बहुत थोड़े दिनों का है, देर न करो। याद रक्खो-देर में कहीं मानव जीवनका अवसान हो गया तो पीछे बहुत पछताना पड़ेगा।
भक्ति से मेरे यथार्थ स्वरूप को तत्त्व से तुम जान सकोगे औरे उसे जानते ही तुम उसी क्षण मुझमें प्रवेश कर जाओगे। मैं और तुम दोनों एक ही हो जायँगे।
यदि तुम्हें जीवन के चरम तथा परम लक्ष्य श्रीभगवान् के धाम पहुँचना है, भगवान् को प्राप्त करना है तो इस बात को कभी न भूल कर सावधानी तथा शीघ्रता के साथ आगे बढ़ते जाओ।
Monday, March 29, 2010
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