Tuesday, March 30, 2010
गुरुदेव सक्सात शिव रूप है पल-दो पल भी यदि कोई उनके सन्मुख हो जाये तो उन्केउपर ऐसी ध्रस्ती करते की उसे यही प्रतीत होता है की यही पल मेरे जीवन का सबसे कीमती पल है गुरुदेव को देख कर भ्रम्ह दर्शन की प्यास मिट जाती है उनको देखते हे सहज रूप में ऐसा प्रतीत होता है जैसे ढ्रपर, त्राता अथवा सतयुग के किसी रूषी को हम देख रहे हैं
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