Sunday, March 28, 2010

अगर आपको इसमें सन्तोष है कि हमारी बुराई सारा संसार जान ले तो मैं भरी सभा में कहता हूँ कि आप लोग जितना मुझको बुरा समझते हैं उससे मैं अधिक बुरा हूँ और जितना आप लोग अच्छा समझते हैं,उससे मैं कम अच्छा हूँ। अब देखिये,इसमें मेरा क्या बिगड़ गया? बताओ जरा! क्या मैं उस जीवन को पसन्द करुँगा,जो आपकी उदारता पर टिका हो? नहीं-नहीं कोई विचारशील मानव उस जीवन को पसन्द नहीं करेगा।

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