जिस समय मन या हृदय एकदम पिघल जाता है,उस समय हृदयमें धारण किये गये भाव स्थायी रुपसे सुस्थिर हो जाते हैं।इसलिये भगवान् के प्रति प्रेम और श्रद्धा अपने हृदयमें स्थापित करके-रोम-रोम-में परिपूर्ण करके करुणाभावसे समय-समयपर भगवान् के लिये रोना चाहिये,व्याकुल होना चाहिये।इसके लिये लगन होना चाहिये।
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