Wednesday, April 7, 2010

अपनी इच्छा को त्याग करके यह कह दो कि ’भगवन्! मैं अपने आपको तुम्हारी चाह पर छोड़ता हूँ।तुम जो चाहो सो करो।मेरी चाह अगर तुम्हारी चाह के विपरीत हो तो उसे कभी पूरी न करना।तुम्हारी चाह ही पूरी हो’।

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