श्रीकृष्ण बँसी ऐसी बजाते कि जो दूध के लिए विरह में छटपटाने वाले बछड़े माँ आने पर दूध पीने लगते वे श्रीकृष्ण की बँसी सुनकर दूध पीना भूल जाते और बँसी का सुख पाकर तन्मय हो जाते। श्रीकृष्ण अपनी बँसी में अपने ऐसे प्राण फूँकते, प्रेम फूँकते कि सुनने वालों के चित्त चुरा लेते।
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