Thursday, April 22, 2010
भगवान् के प्रेमका मूर्तिमान् विग्रह बने हुए भक्तको सारा संसार परम प्रेममय और परम आनन्दमय प्रतीत होने लगता है।वह जिस मार्गसे जाता है उसी मार्गमें श्रद्धा,प्रेम,भक्ति,आनन्द,समता और शान्तिका प्रवाह बहने लगता है।ऐसे भक्तको अपने ऊपर धारणकर धरणी धन्य और सनाथ होती है,पितरगण प्रमुदित हो जाते हैं और देवता नाचने लगते हैं।
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