Tuesday, April 13, 2010
हम लोग अपराध करनेसे नहीं हारते हैं और जब उसके परिणाममें डूबने लगते हैं तब अपना ही विकार अपनेको आगे नहीं बढ़ने देता है।लेकिन उबारनेवाले कभी नहीं थकते।कोई बात नहीं।प्यार करनेवाले माता-पिता हमारे मौजूद हैं।उन्हींके बच्चे तो हम हैं।सजाके,सँवारके,सुन्दर बनाके उन्होंने दुनियामें भेजा,कीचडमें हम गिर गये।कपड़े गन्दे हो गए।तो भी वे करुणामयी माँ,हम गिरे-पड़े,रोते हुए बच्चेको उठानेमें कभी पीछे नहीं हटते।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment