Sunday, April 11, 2010

यदि अभिमान न छूटॆ तो इसके लिये आर्तभावपूर्वक भगवान् से ही प्रार्थना करनी चाहिये कि ’हे नाथ! मैं अभिमान छोड़ना चाहता हूँ,पर मेरे से छूटता नहीं,क्या करुँ!’ तो वे छुड़ा देंगे।जो काम हमारे लिये कठिन-से-कठिन है,वह भगवान् के लिये सुगम-से-सुगम है।अत: अपनेमें कोई दोष दीखे तो भगवान् को ही पुकारना चाहिये,अपने दोष को महत्व न देकर श...रणागतिको ही महत्व देना चाहिये।

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