क्षमाप्राथी वही हो सकता है,जो की हुई भूल को किसी भी प्रलोभन तथा भय से दुहराता नहीं है अपितु पूर्ण निर्दोषता ही जिसे अभीष्ट है,अथवा जो अपना सर्वस्व देकर निर्दोष रहना चाहता है।निर्दोषता को सुरक्षित करने के लिये जिसे बड़ी-से-बड़ी कठिनाई सहने में प्रसन्नता होती है,वही सच्चा क्षमाप्राथी है।
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