Sunday, April 25, 2010

हे नाथ!तुम्हारे सिवा हम-सरीखे पामर गरीब दीनों को कौन आश्रय देगा?अपनी ही ओर देखकर ही अब तो हमें खींचकर चारु चरणोंमें डाल दो।प्रभो! हमें मोक्ष नहीं चाहिये,तुम्हारा कोई धाम नहीं चाहिये,स्वर्ग या मर्त्यलोकमें कोई नाम नहीं चाहिये।हमें तो बस,तुम अपनी चरणरजमें बेसुध होनेवाले पागल बना दो।तुम्हारा नाम लेते ही नेत्रोंसे आनन्दके आँसुओंकी धारा बहने लगे,गद्गद् होकर वाणी रुक जाये और समस्त शरीर रोमाञ्चित हो जाये।

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