Monday, April 12, 2010

अगर आप कहें कि हम अपने असत् को अपने प्रिय जनों के सामने रखेंगे तो हमारा आदर नहीं रहेगा।अगर आपको इतना ध्यान है कि हमारा आदर बना रहे,तो उस असत् को निकाल दो।प्रश्न ही नहीं आयेगा।लेकिन अपने जाने हुए असत् का त्याग भी न कर सको,प्रकट भी न कर सको,और आदर भी चाहो।तो सच मानो,धीरे-धीरे जो आप अनादर से बचना चाहते हो,यह बहुत बड़े अनादर की तैयारी है।

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