इतना तो करना स्वामी, जब प्राण तन से निकले...
गोवोंद नाम लेकर तब प्राण तन से निकले...
श्री गंगा जी का तट हो या युमना का बंसी वाट हो....
मेरा सावरा निकट हो जब प्राण तन से निकले...
इतना तो करना स्वामी, जब प्राण तन से निकले...
पीताम्बरी कासी हो, छबी मन मै ये बसी हो...
होठो पे कुछ हसी हो, जब प्राण तन से निकले...
गोवोंद नाम लेकर तब प्राण तन से निकले...
जब कंठ प्राण आये, कोइयी रोग न सताये...
यम दरस न दिखाये, जब प्राण तनसे निकले...
गोवोंद नाम लेकर तब प्राण तनसे निकले...
उसवक्त जल्दी आना, नहीं स्याम भूल जाना...
राधे को साथ लाना, जब प्राण तन से निकले...
गोवोंद नाम लेकर तब प्राण तन से निकले...
एक भक्त की है अर्जी खुद गरज की है जर्गी ...
आगे तुम्हारी मर्जी, जब प्राण तन से निकले...
गोवोंद नाम लेकर तब प्राण तन से निकले...
इतना तो करना स्वामी, जब प्राण तन से निकले...
Tuesday, April 20, 2010
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