Saturday, April 17, 2010
अगर आपको निकम्मा ईश्वर प्यारा लगता हो,वह निष्ठुर भी हो,निकम्मा भी हो,हमें न भी चाहता हो,तब भी अगर आप उसे अपना कह सकें,तो स्मृति जगेगी।आज मालूम है,क्या है?एक सज्जन बीमार हुए।उनकी स्त्री ने कहीं सुन लिया कि भगवान् सबकी रक्षा करते हैं।बस.खूब पूजा हुई,पति अच्छे हो गये।दोबारा बीमार हुए,खूब पूजा हुई,मर गए।ठाकुरजी को उठाकर फेंक दिया।
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