आप अपनी करनी की तरफ मत देखो, अपने पापोंकी तरफ मत देखो, केवल भगवान् की तरफ देखो जैसे विदुरानी भगवान् को छिलका देती हैं तो भगवान् छिलका ही खाते हैं छिलका खानेमें भगवान् को जो आनन्द आता है, वैसा आनंद गिरी खाने में नहीं आता कारण कि विदुरानी के मनमें यह भाव है कि भगवान् मेरे हैं
No comments:
Post a Comment