Thursday, April 1, 2010

प्रभात के समय साधकों को जो प्रेरणा होती है, वह शुभ होती है। तुम जब कभी व्यावहारिक परेशानियों में उलझ जाओ तो विक्षिप्त चित्त से कोई निर्णय मत लो। प्रातः काल जल्दी उठो। स्नानादि के पश्चात् पवित्र स्थान पर पूर्वाभिमुख होकर बैठो। फिर भगवान या गुरुदेव से, जिनमें आपकी श्रद्धा हो, निष्कपट भाव से प्रार्थना करोः 'प्रभु ! मुझे सन्मार्ग दिखाओ। मुझे सद्प्रेरणा दो। मेरी बुद्धि तो निर्णय लेने में असमर्थ है।'

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