Monday, June 21, 2010

मोह के कारण ही तुम सांसारिक भोग-सुखोंको चाहते हो और सांसारिक दु:खोंको भयानक मानकर उनसे भागना चाहते हो।विस्वास करो,जो सुख भगवान् का विस्मरण कराकर भगवान् की ओर अरुचि उत्पन्न कर दे,उसके समान कोई भी हमारा शत्रु नहीं है।और जो दु:ख विषयोंसे हटाकर भगवान् की ओर लगा दे,उसके समान हमारा कोई मित्र नहीं है।

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