भगवान् का भक्त होने का तात्पर्य है-’मैं भगवान् का ही हूँ’ इस प्रकार अपनी अहंताको बदल देना।भगवान् में मन लगाने का तात्पर्य है-भगवान् को अपना मानना।भगवान् का पूजन करने का तात्पर्य-सब कार्य पूजाभावसे करना।भगवान् को नमस्कार करने का तात्पर्य है-अपने-आपको भगवान् के समर्पित करना।
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