skip to main
|
skip to sidebar
AMRUTBINDU
Sunday, June 20, 2010
हे नाथ ! हे परमेश्वर ! हे देवेन्द्र ! हे दयालु! हे अच्युत ! मैं आपसे एक वर चाहता हूँ, वह यह है की प्रभो! जन्म-जन्मान्तरमें मेरी आपमें सुदृढ़, भक्ति बनी रहे
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Followers
Blog Archive
►
2013
(1)
►
July
(1)
►
2012
(70)
►
October
(10)
►
September
(19)
►
August
(13)
►
April
(18)
►
March
(10)
▼
2010
(246)
▼
June
(60)
जिस प्रकार नदी या समुंदर पार करते समय नाविक पर विश...
इस देह में यह सनातन जीवात्मा मेरा ही अंश है और वही...
हे नाथ ! हृदयमें आपकी लगन लग जाय। दिल में आप धँस ज...
संसार में माता-पिता, भाई-बहन, पति-पत्नी के सम्बन्ध...
शरणागत भक्त को भगवान् का नाम स्वाभाविक ही बड़ा मीठा...
जिसने हमें सब कुछ दिया है,उसने अपने को गुप्त रखा ह...
जिसने हमें सब कुछ दिया है,उसने अपने को गुप्त रखा ह...
शरणागति एक ही बार होती है और सदा के लिये होती है। ...
मोह के कारण ही तुम सांसारिक भोग-सुखोंको चाहते हो औ...
भगवान् हमें गोद में लेने के लिये तैयार खड़े हैं,केव...
यह नियम है कि जिसके मन की बात पूरी होती है,वह उससे...
जो होता है भगवान् की मर्जी से ही होता है। भगवान् क...
अपने को ही सुधार.....
आत्म-साक्षात्कारी सदगुरुदेव और ईश्वर में तनिक भी भ...
जो पतित सूर्य का प्रकाश पाता है, जल जिसकी प्यास बु...
प्राणिमात्र में परमात्मा को निहारने का अभ्यास करके...
उदारता पदार्थों की भी होती है और विचारों की भी होत...
निर्दोषता की अभिव्यक्ति तभी सुरक्षित रह सकती है,जब...
अपने से सुखियों को देखकर आप प्रसन्न हो जायं।अपने स...
आप अपने तन,मन,धन सबकी सार्थकता प्रभु की प्रसन्नता ...
हे नाथ ! हे परमेश्वर ! हे देवेन्द्र ! हे दयालु! हे...
ज्ञानी गुरू की शरण में रहते हुए उनकी ज्ञानरूपी खटा...
परमात्मा मिलना उतना कठिन नहीं है जितना कि पावन सत्...
मेंहदी हरी दिखती है लेकिन उसमें लाली छुपी है। ऐसे ...
संसार में माता-पिता, भाई-बहन, पति-पत्नी के सम्बन्ध...
गुरुकृपा, ईश्वरकृपा और शास्त्रकृपा तो अमाप है। किस...
भगवान् का भक्त होने का तात्पर्य है-’मैं भगवान् क...
जब तक 'तू' और 'तेरा' जिन्दे रहेंगे तब तक परमात्मा ...
भगवान् परम आश्रय हैं,चाहे सारा संसार तुम्हें भूल ज...
किसी दूसरेके दु:ख को अपना दु:ख बना लो और उसके दु:ख...
ये विरक्त हैं,ये त्यागी हैं,ये विद्वान हैं,इनको भग...
इच्छाएँ हमारी बेवकूफी से पैदा होती हैं और आवश्यकता...
चाहे जितने दार्शनिक ग्रन्थ पढ़ लो, समस्त विश्व का ...
ज्ञान होने पर नयापन कुछ नही दीखता अथार्थ फल अज्ञान...
ऐसे स्वप्न जैसे जीवन में लोग बेकार का तनाव खिंचाव ...
दूसरे कर्म तो कर्ता अपने तरफ से करता है, तब फल होत...
वे लोग अपने हृदय में गोविन्द से भी बढ़कर स्थान अपन...
हम जो सत्कार्य करते हैं उससे हमें कुछ मिले – यह जर...
इच्छाएँ हमारी बेवकूफी से पैदा होती हैं और आवश्यकता...
हे आत्मारामी ब्रह्मवेत्ता गुरू ! हमारा हृदय खुला ह...
ऐसा कोई भगवान का प्यारा साधक है ही नहीं जिसके जीवन...
भूतकाल जो गुजर गया उसके लिये उदास मत हो। भविष्य की...
जो धन से सुख चाहते हैं, वैभव से सुख चाहते है, वे ल...
करने की, मानने की और जानने की शक्ति को अगर रूचि के...
'उत्तम-से-उत्तम भूषण क्या है ? शील। उत्तम तीर्थ क्...
अगर शीलरूपी भूषण हमारे पास नहीं है तो बाहर के वस्त...
गुरुदेव का सान्निध्य साधक के लिए एक सलामत नौका है ...
जिस बालक को माँ ने अपना माना है,वह छोरा दौड़कर गोद ...
भयंकर से भयंकर परिस्थिति आ जाय,तब भी कह दो-"आओ मेर...
जिस प्रकार वस्त्र शरीर से भिन्न हैं, वैसे ही आत्मा...
जोअस्तित्व है उस अस्तित्व का ज्ञान नहीं है इससे हम...
शरीर को मैं कहकर बड़े-बड़े महाराजे भी भिखारियों की...
जैसे सोना जब खान के अन्दर था तब भी सोना था, अब उसम...
ओ तूफान ! उठ ! जोर-शोर से आँधी और पानी की वर्षा कर...
जीवन में ऐसे कर्म किये जायें कि एक यज्ञ बन जाय। दि...
जिसके स्पर्शमात्र से बिच्छू के काटने जैसी पीड़ा हो...
भजन के द्वारा हम भगवान् को खरीद लेंगे-ऐसा भाव मत ...
हे नाथ! आप मिलें चाहे उम्रभर न मिलें, दर्शन दें चा...
यदि रोग को भी ईश्वर का दिया मानो तो प्रारब्ध-भोग भ...
झूठे झगड़ेको छोड़कर साधनमें लग जाओ-जी-जानसे लग जाओ। ...
►
May
(44)
►
April
(98)
►
March
(44)
About Me
Dayena Patel
View my complete profile
No comments:
Post a Comment