हे नाथ! आप मिलें चाहे उम्रभर न मिलें, दर्शन दें चाहे न दें, पर हम तो आपके ही हैं ।
जो पतित सूर्य का प्रकाश पाता है, जल जिसकी प्यास बुझाता है, वायु जिसे श्वास लेने देती है, पृथ्वी जिसे आश्रय देती है, आप उसे प्यार नहीं दे सकते
जहाँ भगवान् के भक्तजन हों, वह जगह पवित्र हो जाती है, वहाँ की वायु पवित्र हो जाती है
Tuesday, June 15, 2010
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