Tuesday, June 15, 2010

दूसरे कर्म तो कर्ता अपने तरफ से करता है, तब फल होता है भगवान का नाम कर्ता के बल से नहीं भगवान के बल से उद्धार करता है इसलिए नाम जपते बड़ा बड़ा सत्संग करने वाले, बड़े बड़े सिद्ध पुरुष भी भगवान का नाम लेते और लवाते है नाम जपत मंगल दिश दसही मरते समय भी भगवान का नाम ले और ॐ ॐकरे तो "प्राण कालेपी "- मरते समय भी कोई मेरा नाम लेता है तो उसकी दुर्गति से रक्षा होती हैं

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