भगवान् परम आश्रय हैं,चाहे सारा संसार तुम्हें भूल जाय,चाहे घर-परिवारके सभी तुमसे मुख मोड़ लें,चाहे तुम सर्वथा निराश्रय हो जाओ,एक बार हृदयसे उनके परम आश्रयत्वपर विश्वास करके मन-ही-मन उनका स्मरण करो। देखोगे,तुम्हें कितना शीघ्र और कितना मधुर और निश्चित आश्रय मिलता है।
No comments:
Post a Comment