Sunday, May 2, 2010

हो जा अजर ! हो जा अमर !!जो मोक्ष है तू चाहता, विष सम विषय तज तात रे।आर्जव क्षमा संतोष शम दम, पी सुधा दिन रात रे।।संसार जलती आग है, इस आग से झट भाग कर।आ शांत शीतल देश में, हो जा अजर ! हो जा अमर !!

No comments:

Post a Comment