भगवान् की व्याकुलता तभी होती है,जब कि वह भक्त संसारके समस्त पदर्थोंसे परमात्मा को बड़ा समझता है;इस लोक और परलोकके समस्त भोगोंको अत्यन्त तुच्छ और नगण्य समझकर केवल एक परम प्यारे परमात्मा के लिये अपने जीवन,धन,ऐश्वर्य,मान,लो्कलज्जा,लोकधर्म और वेदधर्म सबको समर्पण कर चुकता है।
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