जो मनुष्य संसारसे दु:खी होकर ऐसा सोचता है को कोई तो अपना होता,जो मुझे अपनी शरणमें लेकर,अपने गले लगाकर मेरे दु:ख,सन्ताप,पाप,अभाव,भय नीरसता आदिको हर लेता,उसको भगवान् अपनी भक्ति प्रदान करते हैं।परन्तु जो मनुष्य केवल संसार के दु:खोंसे मुक्त होना चाहता है,उसको भगवान् मुक्ति प्रदान करते हैं।
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