Sunday, May 2, 2010

अनमोल वचन...

1) जगत कि ओर देखने वाला अहंकर से भरता है, प्रभु कि ओर देखने वाला प्रेम से पूर्ण होता है
2) अहंकर सदा लेकर प्रसन्न होता है, प्रेम सदा देकर संतुष्ट होता है
3) अहंकर को अकड़ने का अभ्यास है, प्रेम सदा झुक कर रहता है
4) अहंकर जिस पर बरसता है उसे तोड़ देता है, प्रेम जिस पर बरसता है उसे जोड़ देता है
5) अहंकर सबको ताप देता है, प्रेम मीठे जल सी तृप्ति देता है
6) अहंकर संग्रह (collection) में लगा रहता है, प्रेम बाँट बाँट (distribution) कर बढता है
7) अहंकर सबसे आगे रहना चाहता है, प्रेम सबके पीछे रहने में प्रसन्न है
8) अहंकर बहुत कुछ पाकर भी भिखारी है, प्रेम आकिंचन रहकर भी पूर्ण-धनी है

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