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AMRUTBINDU
Sunday, May 2, 2010
जो बिना सीखे हो, वही सच्चा ’ज्ञान’ है अर्थात् स्वभावत: आ जाय । जो बिना हेतु के हो, वही सच्चा ’प्रेम’ है । और जो बिना किये हो, वही सच्चा ’त्याग’ है, क्योंकि सच्चा त्याग करना नहीं पड़ता, हो जाता है
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