Sunday, May 2, 2010

जहाँ भी गुरुवर चरण धरे वो धरती नसीबों वाली है...

श्रद्धा भाव से गुरु प्रेम में भक्त जो मारे गोता है ,
बिन मांगे सब कुछ वो पता ,उसका मंगल होता है,
गुरु ज्ञान के सूरज से फिर रात न रहती काली है,
जहाँ भी गुरुवर चरण धरे वो धरती नसीबों वाली है,
हम तो जाते भूल उन्हें पर वो तो पास ही रहते हैं,
उनका ह्रदय कोमल निर्मल सदा वो हित ही करते हैं,
हम सबका जीवन एक बगिया , वो बगिया के माली हैं,
जहाँ भी गुरुवर चरण धरे वो धरती नसीबों वाली है,
गुरु शिष्य का रिश्ता जग में सबसे प्यारा होता है ,
पवन हो जाता है वो जो गुरु की याद में रोता है,
गुरु आज्ञा मानी तो समझो अपनी बिगड़ी बना ली है,
जहाँ भी गुरुवर चरण धरे वो धरती नसीबों वाली है …
इनके चरणों में सुख सच्चा , सरे तीर्थ धाम यही ,
गुरु जो देते उससे ऊँचा होता है कोई नाम नहीं,
सार्थक है बस उसका जीवन , जिसने भक्ति पा ली है,
जहाँ भी गुरुवर चरण धरे वो धरती नसीबों वाली है …
निगुरे निंदक महा पापी निर्दोष पे डिश लगते है ,
फिर भी कैसा संत ह्रदय वो सब कुछ सहते जाते हैं,
कर्मों की गति गहन है निंदक मद में फुले जाते हैं ,
ऐसे महापापी तो सीधे नरक कुंड में जाते हैं...

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