skip to main |
skip to sidebar
धार्मिक आदमी वह नहीं है,जो ईश्वर को खोजता है,बल्कि धार्मिक आदमी वह है,जिसे खोजने के लिए ईश्वर को मजबूर होना पडे। सिर्फ मंदिर जाने से कोई धार्मिक नहीं हो जाता,धार्मिक तो वह है,जो जहां बैठ जाए,वह जगह मंदिर बन जाए। जहां भी जाए,वहीं मंदिर की सुगंध आने लगे। जहां खडा हो जाए,वह भूमि पवित्र हो जाए। जहां देख ले,वहां प्रार्थना की हवा छा जाए।
No comments:
Post a Comment