जो खुद बड़ा होता है, वह दूसरे को भी बड़ा ही बनाता है । जो दूसरे को छोटा बनाता है, वह खुद छोटा होता है । जो वास्तवमेँ बड़ा होता है, उसको छोटा बनने मेँ लज्जा भी नहीँ आती । क्षत्रियोँ के समुदाय मेँ, अठारह अक्षौहिणी सेना मेँ भगवान घोड़े हाँकनेवाले बने । अर्जुन ने कहा कि दोनोँ सेनाओँ के बीच मेँ मेरा रथ खड़ा करो तो भगवान शिष्य की तरह अर्जुन की आज्ञा का पालन करते हैँ । ऐसे ही पाण्डवोँ ने यज्ञ किया तो उसमेँ सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण का पूजन किया । परंतु उस यज्ञ मेँ ब्राह्मणोँ की जूठी पत्तलेँ उठाने का काम भी भगवान ने किया । छोटा काम करने मेँ भगवान को लज्जा नहीँ आती । जो खुद छोटा होता है, उसी को लज्जा आती है और भय लगता है कि कोई मेरे को छोटा न समझ ले, कोई मेरा अपमान न कर दे ।
Tuesday, April 17, 2012
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