सहजावस्था
न जागृत हैं, न स्वप्न है, न सुषुप्ति हैं, ना मूर्छा हैं और न समाधि हैं |
सुषुप्ति और सहजावस्था में फर्क यही है कि सुषुप्ति में तो बेहोशी रहती
हैं, पर सहजावस्था में बेहोशी नहीं रहती, प्रत्युत होश रहता है, जागृति
रहती है| ज्ञान की एक दीप्ति रहती हैं|
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