उल्लुओं की पंचायत इकट्ठी हुई| एक ने दूसरे से पूछा के तुम में से किसी ने सूर्य देखा है? भला उन में से किसी ने सूर्य देखा हो तो हां कहे| उनहोंने कहा कि सूर्य होता ही नहीं| यही दशा अज्ञानी लोगों की है| वे ईश्वर के लिए कहते हैं कि ईश्वर है ही नहीं| वे संसार को सत् समझकर बैठे है|
अपने आपको भूल के, हैरान हो गया,
माया के जाल में फंसा, बैरान हो गया|
*** यदि मनुष्य वाणी का सदुपयोग करेगा अर्थात मौन धारण करेगा अथवा उचित और पर्याप्त बोलेगा तो जगत के बहुत से झगड़े मिट जायें....
Wednesday, March 21, 2012
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