Wednesday, March 21, 2012
व्याकुलता क्यों ?
एक मंत्री धर्मात्मा और सत्संगी था| उसे राज दरबार का बहुत काम करना पड़ता था| कभी कभी उससे तंग आ जाता था| परन्तु बाद में जब उसे स्मरण होता था कि यह संसार अनित्य है, तब ठहाके मारता था| कहता था - "में यह क्या कर रहा हूं| किस का काम कर रहा हं? सब नाश्वत है, तो फिर व्याकुलता किसके लिए?"
हमें भी सब अनित्य जानकर दुनिया में चलना चाहिए| विषयों में फंसकर अपना जीवन बर्बाद नही करना चाहिए|
*** सदैव सोच समझकर बोलना चाहिए, नहीं तो शान्ति में रहना चाहिए| बुद्धिमान मनुष्य वह है, जो बोलने से पहले सोचता है|
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